तेजपाल प्रकरण के मायने

Career Killing Moves

Career Killing Moves
Courtesy: theindiechicks.com

कॅरियर बनाने में जितना समय लगता है, अपने आपको स्थापित करने में जो मशक्क़त करनी पड़ती है, उसके मुकाबले इसके बिगड़ने और बिखरने में कुछ समय नहीं लगता है।

तो क्या यह माना जाए कि आपका सजा-संवरा कॅरियर ताश के महल की तरह है, जो हवा की एक मामूली झोंके से भरभरा कर गिर जाएगी?

जी नहीं, बिलकुल नहीं। यह निर्भर करता है कि आपने अपनी कॅरियर को, अपनी पोजिशन, अपनी पहचान को वैसा ही बना कर रखा है न, जैसे छवि आपने कॅरियर में पहली मर्तबा बनायी थी। इसमें कोई स्खलन नहीं हुआ, बल्कि उसे निरंतर निखारने की कोशिश की।

और…, आपकी पहली छवि आपका वह निर्णय था, जो आपने बनाना चाहा था और जो संघर्ष और मेहनत के बदौतल आपको मिला। आपने उसे ढोने की कोशिश नहीं, बल्कि उसे जीने की कोशिश की।

अपनी उस छवि के प्रति आप हमेशा ईमानदार रहे, समर्पित रहे। वह जीविका साधन बना, न कि धंधा-पानी का जुगाड़ या दूकानदारी का जरिया। कम-से-कम विलासिता और व्यसन का माध्यम तो न ही बना हो।

मुलम्मा चाहे जितनी चकाचौंध भरी क्यों न हो, वह कुछ समय तक के हो सकती है। इसके उतरने में चाहे जितना समय लगे, उतरना तय है और उतरते ही वासन कितना खरा है, यह कोई भी बता सकता है। तरुण तेजपाल प्रकरण इसकी एक जीती-जागती मिसाल है।

मीडिया जगत में तहलका पत्रिका जिस तरह एक ‘फलैश’ की तरह चमकी और तरुण तेजपाल का सितारा जिस तरह से आसमान चढ़ा, जिस तरह से वह रातों-रात ‘नेशनल हीरो’ बने, क्या वह वाकई में वैसा ही था? नहीं, वह एक ‘बायस्ड एक्टिविटी’ थी। पत्रकारिता के आदर्श के एकदम विपरीत।

Kill Your Career

Kill Your Career
Courtesy: worklifecareers.com

तहलका पत्रिका की देखा-देखी ‘सनसनीखेज खबर ही सबसे बड़ी सुर्खी है, वही सबसे बड़ी खबर है’, जैसी सोच को एक सिद्धांत, एक मानक बनाने की कवायद में कई टैब्लॉयड और अख़बार कुकुरमुत्ते की तरह उग आए। विडम्बना यह कि कई टीवी न्यूज चैनल आज भी इस सोच को पाले हुए हैं।

लेकिन तेजपाल प्रकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि पूर्वाग्रहग्रस्त पत्रकारिता कभी चिरस्थायी नहीं हो सकती है। यह प्रकरण एक अहम सन्देश यह भी देता है कि जिस विचारधारा से, जिस काम से आपकी छवि बनती है, उसे न केवल पेशेवर बल्कि निजी जीवन में भी जिएं.

शुक्र है कि कुछ और बड़े मीडिया हाऊस ‘खोजी पत्रकारिता’ का सही अर्थ समझते हैं। वे जानते हैं कि खोजी पत्रकारिता का मतलब सनसनी पैदा करना नहीं है। अच्छे पत्रकार जानते हैं कि केवल घटना और तथ्य महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है घटना और तथ्य के सन्दर्भ का बड़ा होना, उसका व्यापक होना।

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