रूकिए अन्ना…! …रुकना मत अन्ना!!

Anna Hazare, Courtesy: ndtv.com

अन्ना के अनशन का सातवां दिन पूरा हो चुका है और अभी यह जारी रहेगी. लेकिन इस बीच उन्हें मनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं. कहा जा रहा है कि सरकार उनसे पिछले दरवाजे से बातचीत कर रही है, जिससे अन्ना खुश नहीं हैं. बकौल अन्ना ‘वे चाहते हैं कि पीएमओ या राहुल गांधी सीधे उनसे बात करें. रुकिए अन्ना…!

पीएमओ से बात करने की बात तो समझ में आ रही है कि अन्ना लोकपाल बिल को दुरुस्त करने के लिए सही जगह पर दस्तक दे रहे हैं. लेकिन राहुल से बात करना, पहला, अभी राजनीति के गलियारे में खड़े एक अपरिपक्व राजनीतिज्ञ से बात करने जैसा ही होगा. लोकपाल जैसे जटिल मुद्दे पर राहुल से बात करना किसी दूधमुंहे बच्चे से किसी दुरूह समस्या पर बात करना और उससे समाधान की आशा रखने के बराबर है. दूसरा, राहुल का कद इतना बड़ा नहीं है. उससे इस मुद्दे पर बात करना मुद्दे की गंभीरता को कम कर देगा, दूसरी ओर, यह बातचीत राहुल के कद को इतना ऊंचा कर देगी कि कांग्रेस पार्टी की तमाम गतिविधियां जिस थिंकिंग लाइन पर चल रही है, वह एक झटके में सफल हो जाएगी.

अन्ना को यह समझना होगा कि वर्तमान सरकार लोकपाल विधेयक से प्रधानमंत्री को बाहर रखने पर विशेष रूप से क्यों आमादा है. राजनितिक हलके में किसी से भी पूछ लीजिये, आपको उत्तर मिल जायेगा.

कांग्रेस की थिंकिंग लाइन

दरअसल, कांग्रेस पार्टी गांधी-नेहरु परिवार की जागीर है और राहुल गांधी हैं उसके वारिस. जिनकी अभी ट्रेनिंग चल रही है, कभी भट्टा-पारसौल में तो कभी पार्टी की संसदीय समिति में या और कहीं भी. वे कांग्रेस पार्टी से भारत के भावी प्रधानमंत्री हैं. इसी के बरक्स वर्तमान सरकार लोकपाल विधेयक से प्रधानमंत्री को बाहर रखने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंके हुए है ताकि जब राहुल प्रधानमंत्री होंगे तो उनके कामकाज पर कोई अंकुश नहीं होगा. वे अपने काम के लिए सिवाय संसद के किसी के प्रति जिम्मेदार नहीं होंगे. मतलब? राहुल एक लोकतांत्रिक देश के निरंकुश शासक होंगे.

तीसरा, सरकार किसी भी सूरत में प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने की फिराक में अन्य दो कारणों से भी है. कारण-एक, इधर बहुत बड़े-बड़े घोटाले हुए हैं, जो प्रधानमंत्री के नाक के नीचे रहनेवाले लोगों ने किये हैं और उनकी छींटें प्रधानमंत्री के ऊपर भी खूब पड़ी हैं. और शर्तिया, आनेवाले समय में ये छींटें, बौछार बनकर उसे नहलाने जा रही है, क्योंकि ‘मुल्क के मुल्करानों की सूरते-हाल कुछ ठीक नहीं है…ग़ालिब’. अभी आर्थिक मंदी की दूसरी लहर शुरू भर हुई है. याद रहे, इस मंदी की पहली लहर भारत में घोटालों की बाढ़ लेकर आई.

Lokpal Bill and Corruption in India, Courtesy: bankstudymaterial.com

कारण-दो, अभी जो फ़रमाया ‘मुल्क के मुल्करानों की सूरते-हाल कुछ ठीक नहीं है…ग़ालिब…’ इसी में छिपा है दूसरा कारण. भई, सीधी सी बात है कि आज जो घोटाले हुए हैं, वे प्रधानमंत्री के चेले-चपाटियों और गुर्गों…सॉरी, भाषा थोड़ी असभ्य हो गई, फिर से कहता हूं. आज जो घोटाले हुए हैं, वे वजीरेआला के वजीरों और सिपाहसालारों ने किये हैं, जो आज की तारीख में नौ शून्य जैसे आंकड़ों की संपत्ति के मालिक हैं. उनकी कई पुश्तें इससे वारी-न्यारी होनेवाली हैं. मगर, इससे प्रधानमंत्री को क्या मिला? ठनठन गोपाल! तो बस ‘मॉर्निंग शोज़ द डे’ को चरितार्थ करते हुए कांग्रेस भावी प्रधानमंत्री राहुल के लिए घोटालों की जमीन तैयार करना चाह रही है. दुर्भाग्य यह कि कांग्रेस इसमें सफल भी होगी. अब यह अलहदा बात है कि इसका फायदा और पार्टियों के प्रधानमंत्रियों को भी बराबर मिलेगा. मतलब यह कि जब घोटाले हों तो प्रधानमंत्री की छत्रछाया में हों और एक प्रधानमंत्री के रूप में राहुल की राहें निष्कंटक रहे, इसलिए जरूरी है कि प्रधानमंत्री (राहुल) का पद लोकपाल के दायरे से बहुत दूर रहे.

अन्ना से अपील

यह साफ़ है कि ऐसी कांग्रेस पार्टी, जो एक ओर गांधी के नाम की माला जपती है और दूसरी गांधी के उसूलों को ठेंगा दिखाती है, से अन्ना कभी समझौता नहीं करेंगे. लेकिन अन्ना को सत्याग्रह, अनशन और अहिंसा के हथियार से देश को आजादी दिलाने में कामयाब रही ‘तब की कांग्रेस’ और ‘अब की कांग्रेस’ के फर्क को बुनियादी तौर पर समझना होगा. वे अगर इशारा भर भी करते हैं कि पीएमओ या राहुल से बात करने के इच्छुक हैं, वहीं उनकी मुहिम को एक झटका लगेगा. क्योंकि, वर्तमान सरकार से धुरफंदी सरकार का उदाहरण स्वंतंत्र भारत के इतिहास में अभी नहीं है.

इसलिए हे अन्ना! जिस तरह से भारत की जनता का प्रत्यक्ष और परोक्ष समर्थन आपको मिला है, लोकपाल के उसी बिल को, जो आपने तैयार किया है, लागू करने से कम कुछ और हासिल मत करना. आप हो आज के गांधी और नाथूराम गोडसे की भूमिका है कांग्रेस. इसीलिए मीडिया ने तुम्हें ‘दूसरा गांधी’ के नाम से नवाजा है.

जय हिंद, जय गांधी, जय अन्ना.

 

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One Response to “रूकिए अन्ना…! …रुकना मत अन्ना!!”

  1. Sant Prasad Gupta Says:

    bahut badhiya tark hai. kam se kam congress par tippadi bahut hi prabhacshali hai…………filhal mai anna par aur unke unke andolan par kahi gayee bat se sahmat nahi hu.

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