हम भ्रष्ट हैं We Are Corrupt

हम भ्रष्ट हैं

Cartoon By Satish Acharya

मुझे ये पूरा विश्वास है कि भ्रष्टाचार आज हम भारतीयों का स्वीकृत आचार बन चुका है. क्षमा चाहूंगा, मैं यहां “हम भारतीयों” पर जोर डालना चाहता हूं. क्योंकि, आज एक-दो आदमी या संस्था नहीं, हम सभी भ्रष्टाचार के दलदल में आकंठ डूबे हैं. आज अगर कोई खुद को ईमानदार कहता है तो मुझे लगता है कि या तो उसे घोटाला करने का अवसर नहीं मिला है और अगर मिला है तो वह कर नहीं पाया है. तभी, वह खुद को इमानदार कह रहा है. बड़ी साफगोई से मैं ये भी कहना चाहूंगा कि मैं भी उसी थैली का चट्टा-बट्टा हूं. मैं भी वो खरबूजा हूं जो दूसरे खरबूजे को रंग बदलते देखकर रंग बदलता है. एक भारतीय होने के नाते मैं भी एक भ्रष्टाचारी हूं.

अपने देश में कोई आदमी कोई सामान कहीं पड़ा हुआ पाता है, तो उसकी पहली मंशा होती है कि वह उस सामान को अपने घर ले जाए. उसके मन में ये ख्याल भी नहीं आता है कि इसे पुलिस के हवाले कर दिया जाए ताकि वह सामान इसके वारिस को मिल जाये. खुदा-न-खास्ते वह पुलिस के पास जाता भी है, तो यह घटना एक समाचार बन जाती है. प्रश्न है, क्यों? क्योंकि, ये घटना इतनी “अनस्पेक्टेड” है कि ये खबर बन जाती है, जबकि अपने ही एशिया के जापान में कोई हलचल भी नहीं होती. कारण यह कि वहां ऐसी घटनाएं आम बात हैं.

लूट-खसोट की लेटेस्ट एपिसोड

अभी अभी हमने चौंसठवां स्वतंत्रता दिवस मनाया है. एक तथाकथित “सनातन देश” के इतिहास में चौंसठ साल महज एक छोटी अवधी है. मतलब का जूस निकालें तो हम कह सकते है कि अभी हम चौंसठ साल के “अबोध शिशु” हैं. अबोध शिशु इसलिए कि क्या करना है और क्या नहीं करना है, का बोध प्रायः उसमें नहीं होता है. यही हालत हमारी, हमारे देश का शासन चलाने वाले कर्णधारों और हमारे तंत्र का है.

To Corrupt The Innocence by Paulo Zzerbato

पूरे देश को “महंगाई डायन” न केवल खा चुकी है, बल्कि पूरा लील चुकी है. करों के तिहरे बोझ से आदमी तिहरा से चौहरा हो चुका है. ऊपर से भ्रष्टाचार का सावन है कि बरसता ही जा रहा है. (पहले क्या कम बरसा था कि इसकी बाढ़ से हमारा मटियामेट हो चुका है.) कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों में हुए घपले और लूट-खसोट इसकी लेटेस्ट एपिसोड है. इस लूट-खसोट को बड़े अच्छे प्लानिंग के साथ अंजाम दिया गया है कि कितना-कितना लूटना है. कहानी दिल्ली के यमुना के पानी की तरह साफ़ है. जरा कॉमनवेल्थ गेम्स के ऊपर होने वाले खर्च के इन ब्यौरों पर गौर कीजिये:

— वर्ष 2006 में जब कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियां शुरू हुई तो इसकी अधिकतम अनुमानित बजट थी 600 करोड़ रूपये. कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए वर्ष 2007-08 के बजट में मात्र 500 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जिसे 2008-09 के बजट में बढ़ाकर 624 करोड़ रुपये कर दिया गया. और, यह मेगा बजट बढ़ते-बढ़ते लगभग 22 हज़ार करोड़ रूपये जा पहुंचा. आज चार साल बाद इसकी गीगा बजट है लगभग 35 हज़ार करोड़ रूपये. (Soucre: http://pib.nic.in) उम्मीद किया जा रहा है कि खेल ख़त्म होते-होते यह 40-45 हज़ार करोड़ का आंकड़ा पर कर जाएगा.

— कॉमनवेल्थ विलेज का बजट था 465 करोड़, जो आज 1400 करोड़ रूपये है.

— परिवहन और संचार साधनों पर पहले 40 करोड़ रूपये खर्च किये जाने थे, जो बढ़ाकर 80 करोड़ रूपये कर दिए गए.

— नए स्टेडियम बनाने के लिए 2004 में 1200 करोड़ रूपये को मंजूरी मिली थी, जो बढ़ते-बढ़ते 5000 करोड़ हो गई.

— फ्लाईओवर्स और पुलों के निर्माण कार्य पर होने खर्चों को कई बार संशोधित किया गया और बढ़ाते-बढ़ाते इसे 1650 करोड़ तक पंहुचा दिया गया.

— सडकों और गलियों को सुंदर बनाने (Streetscaping) का खर्च कॉमनवेल्थ गेम्स बजट में था ही नहीं, जिसे लूट के इरादे से शामिल किया गया और बजट रखा गया- 1000 करोड़.

— इवेंट प्लानिंग और दर्शकों के मनोरंजन के लिए जब 920 करोड़ रूपये काफी कम लगे तो इसे 2307 करोड़ रूपये कर दिया गया.

— सुरक्षा और सुरक्षा के उपायों के लिए 370 करोड़ रखे गए थे, पर आतंकी कार्रवाई की हालिया घटनाओं से इसमें काफी इजाफा कर दिया गया है. पूरा पता नहीं कितना है, मगर खबर है कि इसे ढाई गुना तक कर दिया गया है.

और, ऊपर से तुर्रा यह है कि हमारे देश के राष्ट्रमंडल खेलों के मंत्रियों के समूह के अध्यक्ष जयपाल रेड्डी ने रक्षामंत्री ए. के.ऐंटनी को पत्र लिखकर आग्रह किया कि वह सेना से कहें कि अक्टूबर में हो रहे खेलों के दौरान वह जो सुविधाएं मुहैया करा रही है, उसका वह पैसा नहीं ले.

“बाबू न भैया, सबसे बड़ा रुपैया” कहावत को मुगलीघुट्टी 555 जन्मघुट्टी की तरह पीने वाले हम भारतीय कॉमनवेल्थ गेम्स के कर्णधारों से कुछ सीखें कि धन कैसे जुटाया, क्षमा चाहूंगा…लुटाया जाता है.

एक “कॉमन मैन” की प्रतिक्रिया

The Hindu Cartoon by Keshav

मेरे एक जानने वाले, जो कि पांडव नगर, दिल्ली में एक जेनरल स्टोर चलाते हैं. उनसे यूं ही बात हो रही थी कि इसबार दिल्ली में अच्छी बारिश हो रही है, मगर इस बारिश कि वजह से कॉमनवेल्थ गेम्स पर असर पड़ सकता है. उन्होंने जो जवाब मुझे दिया उसे सुनकर मैं सकते में आ गया. सदमा-सा लगा मुझे कि एक आम आदमी कितना निराश हो चुका है आज के हालात से. उन्होंने कहा “मेरी भगवान से प्रार्थना है कि ये गेम्स हो ही नहीं पाए, तभी इन लूटेरों का चेहरा काला होगा. अपने यहां ये तो नंगे हो ही चुके हैं, विदेशों में, जहां ये साफ़-चिक्कन बन के जाते हैं, वहां इनका नंगा होना जरूरी है.”

इधर कुछ दिनों से मैं बड़ी शिद्दत से ये बात गौर कर रहा था कि अब घोटालों और घपलों की खबर से जनता बेचैन नहीं होती है. अब वो उतनी रुचि से इन घटनाओं के प्रति प्रतिक्रियाशील नहीं है. इनके विरोध में न तो धरने होते हैं, न कोई पी.आई.एल. याचिकाएं दायर होती हैं, जैसा कि नब्बे के दशक में हुआ करता था. लगता है कि जनता के लिए ऐसी घटनाएं रोजमर्रा के ट्रैफिक जाम, राहजनी या कश्मीर के किसी इलाके में गोलियां चलने जैसी आम खबर है.

ये अभी के हालात हैं, जब शिशु महज चौंसठ साल का है, पूत के पांव पालने में नज़र आने लगे हैं. जबकि अभी तो शिशु के खेलने-कूदने-खाने और शरारत के दिन आने बाकी हैं, जो कि सच्चे मायने में बचपन कहलाता है. तब क्या होगा? और तब क्या होगा, जब वो जवान होगा?

हालात जो भी हों वह तो भावी है, मगर आज आम जनता यह मान कर जी रही है, जैसे इस देश में यही सब होगा. और, इतिहास कहता है कि जब-जब किसी समाज या देश के जनमानस में ऐसी भावना घर करती है, तब-तब वह समाज या देश पतन की और बढ़ा है, तब तब वह गुलाम हुआ है.

कहने का मतलब…..इस देश के भविष्य के आसार अच्छे नहीं हैं. मैं एक आम आदमी, कम-से-कम मुझे तो अच्छा नहीं दिख रहा है.

बेहद ………….. (रिक्त स्थान की पूर्ति आप स्वयं करें) !
शायद बेहद की भी एक हद होती होगी !
मगर ये तो अनहद है !!!

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10 Responses to “हम भ्रष्ट हैं We Are Corrupt”

  1. mohammad sajid hussain Says:

    दुःख होता है देखकर भारत के इन नेताओं को जो अपनी-अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के अलावा और कुछ नहीं जानते. जब भी भारत Olympic Games में कम मेडल लाता है या फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप में qualify नहीं कर पाता है तो हम कहते हैं कि हममें योग्यता (talent) की कमी है. सच्चाई तो यह है कि हमारे नेताओं में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है.

    जितना पैसा यह राष्ट्रमंडल खेल पे लगा रहे हैं, उसका आधा भी अगर ठीक तरीके से यह खेल के विकास के लिए लगायेंगे तो qualify क्या हम बार-बार फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप जीत पाते. जाने या अनजाने हम अपने देश के अनगिनत प्रतिभाओं को मार रहे हैं. मैं यह सब इसलिए कह रहा हूँ कि कभी मैं भी एक छोटा-मोटा सा athlete हुआ करता था. मैं दो बार Sub-junior and Junir national level पे Orissa boxing team को represent कर चुका हूँ. और मैं जिस प्रांत से हूँ वहां की ज्यादातर आबादी आदिवासियों की है. पिछले कई सालों से देख रहा हूँ यहाँ के बच्चे सबेरे मजदूरी के लिए निकलते हैं और ताबड़तोड़ मजदूरी के बावजूद शाम को अपने अपने फटे-पुराने जूते के साथ फ़ुटबॉल या hockey खेलते हैं. आपको यह जानकर खुशी होगी कि Dilip Tirki इन्हीं आदिवासियों में से एक है, जो कि भारतवर्ष के लिए hockey खेल चुके हैं. क्या आप को पता है यह लोग शादी के दौरान दहेज़ में क्या मांगते हैं? बस एक जोड़ी stud (football or hocky shoes) या एक football या hocky stick.

    यह अच्छी बात है की पहली बार खेलों को लेकर हमारे parliamen में इतनी गंभीरता से बहस हुयी है! डर इस बात का है की यह आखरी बार ना हो. अगर भ्रष्टाचार ना होता तो शायद यह बहस भी ना होती.

  2. Alok Says:

    Hello Bhiya ka khub kahi hi, your article is mirror of current scenario of our society. We all are common man and want to become a blue cat in as soon as possible so we kill our moral and responsibility and become the richest man in the world and do every thing what is possible to us, never think who is I and what are our responsibility…

  3. Charul Duggal Says:

    Chahe kharab ho ya bure ho par Common Wealth Games (CWG) to nishichit taur par hokar hi rahenge yeh to pakka hai. Ab chahe games jaise bhi ho par pure duniya me India ne apna naam roshan to kar hi liya hai. Positive image na sahi to negative image hi sahi kuch to India ne kama hi liya hai….CWG ko ab bas 30 hi din bacche hai par poori duniya me yeh charcha ka vishay bana hua hai ki India CWG kar bhi payegi na nahi…..poori duniya me inn games ko lekar kai tarah ki baate ho rahi hai…..negative image to ban hi chuki hai…..Ab games ka kya hoga yeh to bhagwan ke bharose chod diya hai Sheila Dixit ne par bhagwan bhi kya krega in rishwat khoro ke aage…. Iss saal itni barish karke bhagwan un rishwat khoro ko yeh bata raha hai ki paisa khana aur time pe kaam na karne ka kya dandh hota hai……par un choro ko koi farak nahi padta chahe games ache ho ya bure par un logo ne to apne bangale bana liye hai aur tijoriyan bhar li hai. Kab tak yeh barish hoti rahegi yeh to pata nahi par 30 dino ke baad India ki poll jarur khul jayegi yeh pakka pata hai.

    Yeh to thi games ki baat ki games ache honge ya bure par mujhe abhi tak ek baat samajh me hi nahi ayi ki kyu Bharat ne games ki maizbani ka zimma liya jabki bharat me itni problems pehle se hi hai. Agar Bharat ke pass 50 hazaar crore rupay the to kyu yeh paise pehle un logo pe lagaye gaye jo abhi bhi gareebi rekha ke niche hai….kyu nahi un logo ko pehle education, khana aur kapde diye gaye… kyu nahi un logo ko pakka makkan diya gaya jo abhi bhi jhopad pattiyo me rehte hai…..kyu itna paisa pani ki tarah barbaad kar diya gaya in games me…ab kya hoga….videsh se log Bharat ayenge…un gareeb logo ki photo lainge…fir koi Slumdog jaisi film banayega fir Bharat ko nicha dikhate hue 8 Oscars awards jeet jayega aur media wale breaking news me dikhayenge ‘Bharat Ki Greebi Ko 8 Oscars Mile Hai’. Yeh hai hamare desh ka haal.

    Har tarah se congress sarkar ke vaade khokle se hote ja rahe hai. Sheila Dixit ne logo se yeh kaha ki 10 August tak saara malba hata liya jayega lekin aaj 25 August tak bhi nahi hataya gaya aur ha baat to sahi hai hum Sheila Dixit ko bhi kaise dosh de sakte hai kyuki unhone 10 August kaha tha kaun se saal ki 10 August yeh nahi bataya tha wo to hum khud hi 10 August 2010 soch ke baith gaye the.

    Bar bar media me yehi dikhaya jata hai ki 40 din reh gaye hai 35 din reh gaye hai aur ab 30 din reh gaye hai….kabhi kisi ne socha hai ki kyu bar bar media wale yeh batate hai ki kitne din reh gaye hai CWG hone me….iss liye nahi batate ki 30 din reh gaye hai jaldi se kaam khatam kro balki isliye batate hai ki sirf 30 din rehte hai jitna loot sakte ho loot lo phir mauka mile na mile.

    Hamare desh ke neta ji ka to yeh haal hai ki apni salary badhane ke liye sansad me hungama karte hai ki hamari 3 guna salary badhayi jaye. Inn logo ko yeh nazar nahi aata ki 50 hazaar crore rupey CWG me lag rahe hai to kam se kam iss waqt to aisi baatein na karein. Aam admi ki salary me se paise kaat kar games ho rahe hai par kya kabhi in neta ji ne kaha hai ki hamari salary badhane ki jagah 3 guna salary kaat do par yeh games ache se karwao taki pure duniya me India ka naam ho….aisi baat to yeh neta ji sapne me bhi nahi bol sakte hai.

  4. shashikant dwivedi Says:

    khel me jab tak rajneeti aur neta shamil rahenge tab tak na to khel ka bhala hone wala hai aur na hi desh ka. mai desh ki baat isliye kar raho hoo kyonki hamare desh ko aajadi ke 63 sal bad kisi antarrashtriya game ke aayojan ka avasar mila hai. jabki cheen sahit anya hamare jaise desh jo ki kareeb ham logo ke hi samay aajad hue, salo pahle is prakar ke game saphaltapoorvak aayojan kara chuke hai. baharhal ham baat karna chahte hai khel mei jajneeti ki. ham netao ki kartoot dashko se dekh rahe hai. suresh kalmadi bhi ekmaje majae politician hai. narsimha rao ki sarkar me bhi jab vo rail mantri the tab un par aarop lag chuke hai. sawal yah hai ki ek politician ko itane bade karyakram ki jimmedari kyou di gai. kya iske liye sarkar ne pahle vichar kiya.

  5. aditya Says:

    tatkalin samsyao par aapka yah blog tarif ke kabil hai

  6. Ranju Kumar B. Yadav Says:

    Your bloging is much appreciable.

    Yes, the whole episode of CWG is just the mirror of our nation which shows where we are going.

    No doubt, the people we choose to lead our society and nation are irresponsible and insensitive but unfortunately they have been chosen by us.

    I don’t know when common man, the people of India, will be conscious before choosing them.

    May god give them an eye to recognize the difference between a crow and cuckoo.

  7. Avtansh Says:

    aap logo ko ek aue baat bata du ki…iss bhrashtachar se nikalana namumkin hai..isiliye koi aisa rasta nikaliye jisase bhrastachar legal ho jaye..jaise TATAKAL ticket

  8. वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण -२०१० (भाग-७) « LOKSANGHRASHA Says:

    […] २१ अगस्त के पोस्ट पर जिसका शीर्षक है हम सभी भ्रष्ट हैं ।’राजीव गांधी हों, वीपी सिंह हों या […]

  9. k.r.arun .Gulzarilal nanda foundation Says:

    Agar desme janlokpal ki aaqj bat ho rahi hy to 1963 se 1980 tak ke gulzarilal nana ji ka yogdan sadacar jagran ko Nhi bhulaya ja sakta .bhart me GandhiWadi niti ke sakar Roop Gulzarilal nanda ji ne Sadacar Jiwan se Sabit kar diya ki Insan Khud ko Sadacar me Dhale to Kabhi Bhi koi Bhi Vikalp banaya ja sakta hai.Aaj DES KI AAJADI NETIKTA MANG RAHI Hai.DES Me RAJNITI KO BADLW KE KIYE NETIK KARANTI KI JARURAT HAI .JAN LOKPAL ,DES KI RAI LIYE BAGER AGAR JALDI ME BANYA GAYA TO KANON KANON BANKAR RAH JAYEGA .MIDIA LOKTANRA KI CETNA MAI ANKHE BAN KAR KAM KARE RASTA JAROR BANEGA . K.r.ARUN

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