ऑनलाइन दस्तावेज और डिजिटल विल Online Documents and Digital Will

आपके (अ)गोपनीय इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों का वारिस कौन है?

क्या आप कंप्यूटर और इंटरनेट सैवी (savvy) हैं? अगर हां! तो क्या कभी आपने सोचा है कि इस दुनिया से चले जाने मतलब आपके गुजर जाने के बाद आपके निजी या सार्वजनिक गोपनीय-अगोपनीय डिजिटल/इलेक्ट्रौनिक दस्तावेजों का क्या होगा? क्या आपके जन्नतनशीं होने के बाद कंप्यूटर और इंटरनेट पर अपलोड वे सभी मेल, सूचनाएं, फोटोज, एलबम (ऑडियो-वीडियोज) सदा के लिए यूं ही ख़त्म हो जायेगी?

क्या आपके जेहन कभी ये सवाल कौंधा है, इस जहां से रुखसती के बाद आपकी उन डिजिटल (परि)संपत्तियों (Digital Assets) का क्या होगा, जिसे सहेजने और समेटने में आपकी वर्षों की मेहनत लगी है, जिसका एक-एक हर्फ़ आपकी कही-अनकही सच्चाई है. वे भविष्य में आपके उत्तराधिकारियों को किस प्रकार प्राप्त हो पाएंगी और उन्हें किस प्रकार दिशा-निर्देशित कर पाएंगी?

नहीं सोचा है! तो सोचिए, क्योंकि एकाध लोगों ने बड़ी अच्छी पहल भी कर दी है. और हां, केवल सोचिए ही नहीं कुछ ठोस कदम भी उठाइए. आखिर चार दिन की इस जिंदगी का क्या भरोसा…आज हैं, कल नहीं!!!

मेरी इस बात को नकारात्मक नहीं लें, क्योंकि ये डिजिटल एसेट्स आनेवाले कल की एक बड़ी समस्या बनने वाली हैं. नहीं विश्वास हो रहा है तो मेरे कुछ अधिक कहने से पहले जरा इन घटनाओं पर पे गौर फरमाइए.

डिजिटल विल का नया कंसेप्ट!!!

नई दिल्ली के एक बिजनेसमैन, जिसका पेंट्स का कारोबार है. उसके कई ईमेल अकाउंट्स हैं. मसलन, एक अकाउंट में उसके आर्टिस्टिक वर्क हैं. दूसरे में ऑडियो रिकॉर्डिंग्स का कलेक्शन और तीसरे में ऑटो बायोग्रफी है. एक अन्य ईमेल अकाउंट में उसके कई राज हैं.

दिल्ली के इस शख्स ने हर अकाउंट के लिए नॉमिनी तय किए हैं. उसने अपने ईमेल अकाउंट्स और उनमें दर्ज डिजिटल सीक्रेट्स की वसीयत अपने बेटों के नाम कर दी है. उसकी इस डिजिटल विल के मुताबिक, जब यह वसीयत करने वाला यानि वह जब इस दुनिया में नहीं रहेगा, तब उनके बेटों को सही पासवर्ड दिया जाएगा. जिसकी मदद से वे उसके इनबॉक्स में प्राइवेट ईमेल्स, पर्सनल फोटो, एलबम्स, डॉक्युमेंट्स, विडियो क्लिप्स को एक्सेस कर सकेंगे.

दिल्ली का यह शख्स नहीं चाहता कि ये चीजें उसकी मौत के साथ ही दफन हो जाएं, इसीलिए उसने अपने बेटों के नाम इसकी वसीयत कर दी है. उसे विश्वास है कि वे इनका दुरुपयोग नहीं करेंगे. राजधानी नई दिल्ली ही नहीं पूरे भारत में शायद यह अपनी तरह का पहला मामला है…मेरी नजर में काफी काबिले-तारीफ़ और दूरगामी सोच की.

इसी प्रकार, विदेश में एक व्यक्ति ने अपने ईमेल अकाउंट्स की वसीयत अपनी बहन के नाम की है. उसकी इच्छा है कि उसकी मृत्यु के बाद उसकी बहन एक ब्लॉग बनाकर उसके अकाउंट्स में दर्ज जानकारियों को सभी के लिए ऑनलाइन कर दे.

जाहिर यह काफी रोचक होगा और लोग उस ब्लॉग को जरूर पढ़ना चाहेंगे कि आखिर वह शख्स नितांत निजी रूप में क्या सोचता था, उसकी वास्तविक मानसिकता और मनोदशा कैसी थी? वह किन-किन समस्याओं से दो-चार हुआ और उससे कैसे निजात पाई? दरअसल, एक मायने में यह एक आदमी की मुकम्मल जिंदगी के विभिन्न पहलुओं से जुड़ी विभिन्न घटनाओं की एक शानदार केसस्टडी होगी…शायद अनोखा, कुछ नया!!!

डिजिटल विल के पेंच: जब होगा राज का पर्दाफ़ाश!!!

यह कहना बड़ा विवादास्पद होगा कि हर इंसान की सोच और फ़ितरत एक जैसी है. क्योंकि सब धन बाइस पसेरी नहीं होता है. लेकिन नग्न सच्चाई कुछ और भी है. मसलन, सूचना क्रांति ने जहां विचारों के आदान-प्रदान में गतिशीलता लायी है, वहीं उसने मनोरंजन के कुछ ऐसे साधन पेश किए हैं जिसने समाज में अनैतिक और अवैध संबंधों को काफ़ी बढ़ावा दिया है. यह एक सच्चाई है कि पर्सनल मेलिंग, चैटिंग और ऑनलाइन कम्यूनिटी फ़ोरम ने हमारे संपर्कों का दायरा काफ़ी बढ़ा दिया है. इन संपर्कों में ऑनलाइन डेटिंग, फ़्लर्टिंग, रोमांस चैटिंग का सबजेक्ट सबसे ऊपर है. आज के यूथ्स यानि तथाकथित जेनरेशन एक्स के साथ-साथ हर एज ग्रुप के यूजर के लिए यह मौजमस्ती का एक बेहतरीन टूल है.

अब एक मर्द या औरत जिसके जीवन में एक से अधिक पर्सनल रिलेशनशिप्स हों वह तो कभी डिजिटल विल के बारे में सोचेगा ही नहीं. क्योंकि उसके कई ऐसे राज पर्दाफ़ाश हो जाएंगे जिससे उनकी काफ़ी किरकिरी हो सकती है. क्योंकि, इसकी कोई गारंटी नहीं है कि उनके वर्चुअल एसेट्स का नॉमिनी उसका दुरुपयोग नहीं करेगा. कम-से-कम उस नॉमिनी की नजर में तो उस इंसान की छवि जरूर ही खराब हो जाएगी.

डिजिटल विल: क्या कहती है साइबर लॉ

डिजिटल विल संबंधी साइबर लॉ की बात हम बाद में करेंगे, उससे पहले आप ये जान लें कि आपके पेड या अनपेड इंटरनेट साईट, इमेल, ब्लॉग आदि अकाउंट का आपके बाद क्या होगा?

वर्तमान में, चाहे गूगल समूह (जीमेल, ऑर्कुट, ब्लॉगस्पॉट आदि) हो या फ़्लिकर, याहू, रेडिफ, फेसबुक, ट्विटर या अन्य कोई सर्च इंजन या इंटरनेट साईट, आप जरा उनके टर्म्स एवं कंडीशन को ध्यान से पढ़िए. इन साइट्स के टर्म्स एवं कंडीशन में कहीं भी इस बात का जिक्र तक नहीं है कि आपके इस दुनिया से प्रस्थान के बाद आपके अकाउंट का क्या होगा? उसे कैसे आपके परिवार के सदस्य या किसी अंतरंग मित्र हवाले किया जाएगा? मेरी नजर में व्यवसायिकता और मानवीय दोनों पहलू से यह एक बड़ा झोल है.

मेरा मानना है कि आनेवाला समय पूरी तरह ऑनलाइन डाक्यूमेंट्स, इंटरनेट एसेट्स और डिजिटल एसेट्स (डिजिटल एसेट्स को वर्चुअल एसेट्स भी कहते हैं) का है. ऐसे में यह झोल व्यक्तिगत और व्यवसायिक दोनों दृष्टियों से हानिकारक है.

— चौंकिएगा मत, क्योंकि वर्तमान में किसी भी देश के साइबर लॉ में डिजिटल विल के बारे में कोई विशेष प्रावधान नहीं है.

— मगर घबराइए मत इसका समाधान है, जैसे- भारत सहित किसी भी देश का कानून आपके डिजिटल विल को आपके सामान्य विल (वसीयत) की तरह ही ट्रीट करता है. लिहाजा, डिजिटल विल कानूनन वैध है.

— साथ ही कई कम्पनियां इस दिशा में सकारात्मक पहल भी कर रही हैं, जैसे- खबर है कि जीमेल (गूगल) जैसी एकाध कंपनियां डिजिटल विल की प्रस्तावना पर विचार कर रहीं हैं.

— खबर यह भी है कि सान फ़्रांसिस्को (यूएसए) की एक कंपनी ने इस तरह की एक सेवा शुरू की है, जहां आप अपने डॉक्युमेंट्स, अपलोड्स और पासवर्ड्स कुछ शुल्क देकर स्टोर कर सकते हैं, जो बाद में आपके चुने हुए नॉमिनी को ईमेल कर दी जाएगी. इसका ब्राईट फ्यूचर देखकर और भी कई कम्पनियां नियोजित (Planned) रूप में इस व्यवसाय में उतर रही हैं.

वर्ष 2009 में 25 सितंबर को बीबीसी वर्ल्ड के एक प्रोग्राम में “Protecting Your Digital Assets After Death” नाम से इस मुद्दे को बड़े सलीके से उठाया गया था, जिसका निचोड़ दो रूप में सामने आया. पहला, सर्च इंजन, इंटरनेट साइट्स और अन्य ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां इस दिशा में एक ठोस पहल करें ताकि वर्चुअल एसेट्स को उसका एक उत्तराधिकारी मिल पाए. दूसरा, आप अपने जिंदा रहते हुए किसी से अपने अकाउंट्स का पासवर्ड शेयर करें, जो कि उसका मिस यूज न करें या फ़िर ऐसा साफ़्ट्वेयर इस्तेमाल में लाएं जो कि आपकी डाटा को स्टोर कर सके.

खैर, डिजिटल विल का कंसेप्ट भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में अभी प्रारंभिक अवस्था में है. कारण यह है कि डिजिटल सूचनाक्रांति को आए अभी हुए ही कितने दिन हैं! लेकिन चीजें अपने स्वरुप में आने को बेकरार हैं!!!

आप किस राह के राही हैं, यह तो आप पर निर्भर करता है. मगर, आप जरूर चाहेंगे कि आपके बाद भी आपकी सोच जिंदा रहे. तो, आपके विचारों का एक अहम और अंतरंग साक्ष्य आपका डिजिटल एसेट्स इसमें आपकी भरपूर मदद करेगा. तो देर किस बात की…कर डालिए आप अपना भी डिजिटल विल!!!

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4 Responses to “ऑनलाइन दस्तावेज और डिजिटल विल Online Documents and Digital Will”

  1. pradeep Says:

    अच्छी जानकारी है, मेरे लिए…………..

  2. sunita zade Says:

    Bahot Badhiya,
    Hamari Sari Shubhakamanae Aapke Saatha Hain…

    sunita

  3. Sunil Says:

    Sir ji, Kya lekh hai

  4. आलोक मिश्र, नोएडा Says:

    वाह! साहब मज़ा आ गया। बहुत ही रोचक और नितांत नूतन पहल है यह। इस तरह की सोच श्यामनंदनजी के ही में मस्तिष्क आ सकती थी। मैं आपके अंग्रेजी ज्ञान का तो पहले से ही कायल था लेकिन हिंदी ज्ञान और भाषा के क्षेत्र में आप किसी पुरोधा से कम नहीं हैं। आपके ब्लॉग्स में दी गई जानकारियां बहुत ही ज्ञानवर्धक और रोचक हैं। अपनी लेखनी अविराम रूप से चलाते रहिए ताकि हमारे कूढ़ मगज को कुछ पोषक तत्व और खाद मिलती रहे। हार्दिक शुभकामनाओं के साथ!

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